दिविप्रा के पश्चिम पुरी स्थित डिस्ट्रिक्ट पार्क के बारे में बहुत कुछ लिख चुका हूँ इस ब्लॉग पर. जन प्रतिनिधियों को प्रतिवेदन दिए. दिल्ली के उपराज्यपाल को लिखा. शहरी विकास मंत्री को लिखा. प्रधानमंत्री को लिखा. राष्ट्रपति को लिखा. आरटीआई एक्ट के अंतर्गत अर्जी दी. सूचना अधिकारी ने कुछ नहीं किया. अपील अधिकारी ने कुछ नहीं किया. केन्द्रीय सूचना आयोग को अपील दी, वह लाईन में लगी है, न जाने कब नंबर आएगा.
सारी दिल्ली सजाई जा रही है दुल्हन की तरह. पुराने मालिक आयेंगे. दिमाग से अभी भी गुलाम हिन्दुस्तानी उनकी खातिर में जमीन आसमान एक कर रहे हैं. इसका असर इस पार्क पर भी पड़ा है. नर्सरी के चारों तरफ दीवार खिंच गई है. नया दफ्तर बना है. दफ्तर तक जाने के लिए रास्ते को कंक्रीट का बनाया गया है. पर पार्क में घूमने आने वालों के लिए कुछ नहीं किया गया.
यह जो दफ्तर बना है उस से पार्क कुछ और ही अजीब लगने लगा है. अगर किसी आर्किटेक्ट से नक्शा बना कर यह दफ्तर बनाया जाता तब उस से पार्क की सुन्दरता और बढ़ जाती. पर दिविप्रा तो शेखचिल्लियों की राजधानी है. पार्क में आने वाले इंसानों की इन शेखचिल्लियों को कोई चिंता नहीं. पार्क में सूअर, कुत्ते घुमते हैं. धूल भरे रास्ते और पार्क. वर्षा होने पर रास्तों में कीचड़ हो जाती है. सूअर कीचड़ में मस्ती करते हैं. शेखचिल्ली अपने वातानुकूलित कमरों में मस्ती करते हैं.
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