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मैं समझता हूँ कि असोसिएशन ने अपने सदस्यों को प्रभावित करने के लिए यह दावा किया है पर इस से फायदा नहीं नुक्सान ही होगा. पहले तो, हर व्यक्ति देख रहा है कि पार्क में कोई सुधार नहीं हुआ है. दूसरे, डीडीए वाले असोसिअशन के इस दावे का गलत इस्तेमाल कर सकते हैं. हमारे प्रतिवेदनों को वह झूठा करार दे सकते हैं. इस दावे से निवासिओं को कोई फायदा नहीं हुआ. असोसिअशन को चाहिए कि वह तुरंत इन बोर्डों को हटा कर नए बोर्ड लगवाए जिस में पार्क की दयनीय स्थिति की बात हो न कि यह कहा जाय कि पार्क में सौन्दर्यकरण और नवीनीकरण करवा दिया गया है.
दो फोटो में आप देख रहे हैं कि विजली के तार जमीन पर खुले पड़े हुए हैं. यह केवल सुरक्षा के हिसाब से ही गलत नहीं है बल्कि नेशनल इलेक्ट्रिकल कोड का भी खुला उलंघन है. पार्क में बच्चे, स्त्री, वृद्ध पुरुष सभी आते हैं. कुत्ते और सुवर भी पार्क में दौड़ते फिरते हैं. कोई भी इन तारों में उलझ कर गिर सकता है, विजली का झटका लग सकता है, नुक्सान हो सकता है.
एक फोटो में आप देख रहे हैं कि डीजल जेनरेटर चलाया जा रहा है. बिना ध्वनि अवरोधक खोल के जेनरेटर चलाना दिल्ली ध्वनि कानून के अंतर्गत अपराध है.
पिछले दिनों इन लोगों ने सीवर का गन्दा बदबूदार पानी पार्क में छोड़ दिया था जिस से बदबू फ़ैल गई थी और बहुत ज्यादा संख्या में मच्छर हो गए थे.
यह कुछ ही फोटो हैं जो पार्क के कुछ हिस्सों को दिखाते हैं. पार्क के कुछ और हिस्से तो इस से भी ज्यादा बुरी हालत में हैं.
हमें मिल कर प्रयत्न करना चाहिए. इस तरह के गलत दावे केवल नुकसान कर सकते हैं.
मैंने इस विषय पर असोसिएशन के प्रधान और सचिव को पत्र लिखा है.
दिनांक ११.०५.२०१० को सम्पादित किया
आज सुबह पार्क में दिल्ली जल बोर्ड के कर्मचारियों ने सीवर का गन्दा पानी पार्क में प्रवाहित किया हुआ था. पार्क का यह हिस्सा बदबू से भरा हुआ था. मेरे पूछने पर उन्होंने बताया कि पार्क के सुपरवाइजर ने उन्हें ऐसा करने के लिए कहा है. मेरे कहने पर उन्होंने उस समय तो जेनरेटर बंद कर दिया पर पाइप पार्क से हटा कर नाले में नहीं डाला. क्या यह सौन्दर्यकरण एवं नवीनीकरण है?
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